What is bearing in Hindi | Types of bearing क्या है | Definition |

Bearing की मदद से एक surface दूसरी surface के ऊपर मुक्त रूप से rotate कर सकती है। इसके कई प्रकार है. हमने types of bearing kya hai यह भी समझाया है. लेकिन इसके पहले जानिये what is bearing in Hindi.

What is bearing in Hindi

यह एक device है, जो मशीन में power transmission और friction कम करने के लिए बहुत काम आती है।

दो surface के बीच में friction को एक दम कम कर देती है।

Bearing  को ज्यादातर shaft और axles में देखा जाता है।

Shaft और axles में structure को support करने के लिए, और axial और radial load को transfer करने के लिए इसका इस्तेमाल होता है।

Bearing kya hai

क्या आप ने कभी सोचा है, की bearing क्यों इस्तेमाल किये जाते है?

शब्द bearing को “to bear” verb से लिया गया है. जिसका मतलब है, support करना।

Definition of bearing in Hindi

Bearing एक machine element है, जो relative motion को desire motion में बदलने के लिए constrain (विवश करना) करती है। और दो moving part के बीच में घर्षण को कम करती है.

इसकी design इस प्रकार होती है, की हमें free linear moment या fix axis के ऊपर free rotation मिलती है।

Types of bearing in Hindi

कुल 6 प्रकार है, Bearing के.

types of bearing in hindi

1)  Plain Bearing

इस bearing को sliding bearing या slide bearing कहा जाता है। यह सबसे आसान प्रकार का bearing होता है।

What is plain bearing in Hindi

महत्व की बात इसमें यह है की इसमें कोई rolling element नहीं होता है।

Plain bearing में भी तीन प्रकार के bearing होते है।

  • Bushing Bearing
  • Integral Bearing
  • Two Piece Bearing

2) Rolling Element Bearing

इन bearing में races के बिच में rolling element होता है।

ऐसे bearing  में load को carried out करने के लिए races के बीच में rolling element की positioning की जाती है। Races मतलब दो bearing rings.

सामान्य रूप से इसमें पांच rolling element जैसे की, Cylindrical roller, needle rollers, spherical rollers, tapered rollers. और balls का उपयोग किया जाता है।

What is Ball bearing in Hindi?

Ball bearing kya hai

Races की gap में balls का उपयोग किया जाता है, उसे ball bearing कहते है।

यह सबसे ज्यादा उपयोग में लिए जाने वाले bearings है।

Ball bearing के भी कई प्रकार है.

Types of ball bearing in Hindi

Single row ball bearing

जैसे की इसका नाम है, सारे bearing balls को एक row में arranged किया जाता है।

Double row ball bearing

इसमें single row की जगह Double row होती है। और इसमें दो grooves cut होते है।

Angular contact ball bearing

Axial load और angular को सहन करने के लिए ऐसे प्रकार के bearing को design किया जाता है.

Thrust ball bearing

Vertical thrust load को handle करने के लिए इस bearings को design किया जाता है.

कई बार horizontal thrust को bear करने के लिए भी उपयोग किया जाता है।

Self aligning ball bearing

Journal load को सहन करने के लिए यह bearing उपयोग में आते है।

Roller bearing क्या है.

Roller bearing working in hindi

Ball bearing के मुकाबले यह bearing load bear करने में ज्यादा capable होते है.

अगर lubrication न मिले तो इस प्रकार के bearings के fail होने के ज्यादा chances होते है।

Types of roller bearing in Hindi

Cylindrical roller bearing

इस तरह के bearing में cylinder का use किया जाता है। मतलब rolling element के तौर पर cylinder का उपयोग किया जाता है।

Gear bearing

Elliptical gears जैसी इसमें arrangement होती है। इसमें smaller satellite gears लगे होते है।

यह bearings efficiency को बढाते है, और sliding friction को बहुत काम कर देते है।

लेकिन इस तरह के gear bearings को manufacture करना challenging होता है।

Spherical roller bearing

Inner ring, outer ring, cages, spherical rollers इस bearing में होते है।

और यह drilling, gear boxes, wind turbines,  और mining में उपयोग में आते है।

Needle roller bearing

लम्बे और पतले cylindrical roller से इस प्रकार के bearing को बनाया जाता है. और इनका आकार needle के जैसा होता है।

ज्यादा surface area के contact में आने के कारण needle roller bearing ज्यादा लोड को सहन कर पाते है।

Pump और compressor में इनका ज्यादा उपयोग किया जाता है.

CARB toroidal roller bearing

सन 1995 में MangusKellstorm ने CARB bearing को invent किया था।

Possible spherical radius से इसका radius of curvature बहुत ज्यादा होता है. यह इसका मुख्य feature है.

3) Fluid Bearing

यह एक special types of bearing होता है, जिसमे कोइ sliding friction नहीं होता, कोई wear नहीं होता है, और कोई vibration नहीं होती है।

Fluid bearing

Bearing load को यह Fluid की मदद से bear करते है।

इसके दो प्रकार है।

  1. Hydrodynamic fluid bearings
  2. Hydro static fluid bearing

4)  Magnetic Bearing

Phenomenon of magnetic levitation का load को support करने के लिए magnetic bearing का उपयोग किया जाता है।

Magnetic bearing

5) Flexure Bearing

इसे इस तरह manufacture किया जाता है, की यह specific degree of freedom के लिए suitable होता है।

Flexure bearing

यह सरल, सस्ते और कम friction वाले  होते है.

6) Jewel Bearing

मुख्य बात इसकी यह है की, इसकी मुख्य spindle jewel-lined pivot hole में बदल जाती है।

कम वजन, कम size, low friction, और बिना lubrication के काम करने की क्षमता इसके फायदे है।

अगर दिया गया load axial नहीं है, तो इसे use करना लाभकारी नहीं है।

Sapphire और synthetic ruby से यह bearing बने होते है।

इनकी size को 10 mm तक बढाया जा सकता है, और यह 500 ग्राम तक का वजन handle कर सकते है।

jewel bearing Hindi

Mechanical watches, और measuring instruments जैसे की gyroscopes, galvanometers, turbine flow meters, dial indicators में इनका उपयोग होता है.

Bearings सामान्य रूप से दो प्रकार के load को झेलने के लिए बनाये जाते है, Radial load और Thrust load.

कोई Bearing radial load को सहन कर सकते है, तो कोई thrust load को सहन कर सकते है.


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Application of bearing kya hai

  1. Power transmission में.
  2. Friction कम करने के लिए.
  3. Structure को support  करने लिए.
  4. CNC और lath मशीन की spindle में.
  5. Measuring instruments जैसे की, dial indicator, galvanometer आदि.
  6. Shaft और motor को जोडने के लिए.

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